कब्ज से राहत के लिए अपनाएं ये आसान उपाय, डाइट और योगासन आएंगे काम

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कब्ज एक आम पाचन समस्या है, जिससे कई लोग परेशान रहते हैं। सुबह पेट ठीक से साफ न होने पर दिनभर पेट भरा हुआ और फूला हुआ महसूस हो सकता है। इससे असहजता, चिड़चिड़ापन और भूख कम लगने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। लंबे समय तक कब्ज रहने पर बवासीर जैसी परेशानी का जोखिम भी बढ़ सकता है।

ऐसे में कब्ज के कारणों को समझना और खानपान व दिनचर्या में जरूरी बदलाव करना महत्वपूर्ण है।

क्या है कब्ज?

आयुर्वेद में कब्ज को ‘मलावरोध’ कहा जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, वात दोष का असंतुलन और पाचन अग्नि का कमजोर होना कब्ज के प्रमुख कारणों में शामिल माने जाते हैं।

आधुनिक दृष्टि से कम पानी पीना, भोजन में फाइबर की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव, बार-बार जंक या फास्ट फूड खाना और शौच की इच्छा को रोकना कब्ज के सामान्य कारण हो सकते हैं।

कब्ज से राहत के लिए क्या करें?

फाइबर बढ़ाएं: अपनी डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। पपीता, अंजीर, किशमिश, चुकंदर, पालक, ओट्स और चोकर वाला आटा उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। फाइबर बढ़ाते समय पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।

पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी लेते रहें। सुबह उठकर गुनगुना पानी पीना कुछ लोगों को मल त्याग में मदद कर सकता है।

हल्का भोजन करें: रात में बहुत ज्यादा और भारी भोजन करने से बचें। तली-भुनी, अत्यधिक मसालेदार और मैदा से बनी चीजों का सेवन सीमित करें। कोशिश करें कि रात का खाना सोने से कुछ घंटे पहले हो जाए।

शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं: नियमित पैदल चलना और व्यायाम आंतों की गतिविधि को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। योग में वज्रासन, भुजंगासन, मालासन और पवनमुक्तासन जैसे आसन भी किए जा सकते हैं, यदि वे आपके लिए सुरक्षित हों।

रूटीन बनाएं: रोज लगभग एक ही समय पर सोने-जागने और शौच जाने की आदत डालें। शौच की इच्छा को बार-बार रोकने से बचें। तनाव कम करने और पर्याप्त नींद लेने पर भी ध्यान दें।

त्रिफला और इसबगोल का इस्तेमाल

आयुर्वेद में कब्ज के लिए त्रिफला चूर्ण और इसबगोल की भूसी का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए इनकी मात्रा और उपयुक्तता अलग हो सकती है। खासकर यदि आप पहले से कोई दवा लेते हैं, गर्भवती हैं या लंबे समय से कब्ज से परेशान हैं, तो इन्हें नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

इसी तरह, डाइट में घी शामिल करना कुछ लोगों के लिए ठीक हो सकता है, लेकिन इसे कब्ज का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर कब्ज बार-बार होती है, कई सप्ताह तक बनी रहती है या घरेलू उपायों के बावजूद सुधार नहीं होता, तो डॉक्टर से सलाह लें। मल में खून आना, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, बिना वजह वजन कम होना या पेट बहुत ज्यादा फूलना जैसे लक्षण हों तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

कब्ज से राहत के लिए सबसे अहम है—पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ दिनचर्या। लगातार समस्या रहने पर केवल घरेलू या आयुर्वेदिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

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