चांदीपुरा वायरस से बच्चों को खतरा, जानें लक्षण दिखने पर क्या करें
देश के कई राज्यों में पिछले कुछ महीनों में चांदीपुरा वायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। गुजरात में हाल में संक्रमण से बच्चों की मौत की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। राजस्थान के डूंगरपुर और सिरोही जिलों में भी बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं।
चांदीपुरा वायरस नया नहीं है। इसकी पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र में हुई थी। गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और पश्चिमी तथा मध्य भारत के अन्य हिस्सों में समय-समय पर इसके संक्रमण की रिपोर्ट मिलती रही है।
यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई के काटने से फैलता है। बारिश के मौसम में नमी और आसपास की गंदगी के कारण सैंडफ्लाई के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। यही वजह है कि मानसून के दौरान इसके संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका रहती है।
चांदीपुरा संक्रमण क्यों है गंभीर?
चांदीपुरा वायरस बच्चों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है और कुछ मामलों में एन्सेफलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन की स्थिति पैदा हो सकती है। गंभीर संक्रमण में मस्तिष्क की सूजन सांस लेने और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित कर सकती है।
संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए तेज बुखार के साथ न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता दिलाना जरूरी है।
बच्चों को ज्यादा खतरा क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे मकानों की दीवारों में दरारें, घरों के आसपास जमा कचरा, घर के पास पशुओं को रखना और खराब स्वच्छता जैसी परिस्थितियां सैंडफ्लाई के संपर्क का खतरा बढ़ा सकती हैं।
बच्चों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका अधिक देखी गई है। इसके अलावा, बाहर अधिक समय बिताने के कारण भी उन्हें संक्रमित कीटों के संपर्क में आने का जोखिम बढ़ सकता है। कुपोषण, भीड़भाड़ और समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलना भी बीमारी के गंभीर परिणामों का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
चांदीपुरा के लक्षण क्या हैं?
शुरुआत में चांदीपुरा संक्रमण के लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। इनमें तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और उल्टी शामिल हैं।
बीमारी के गंभीर होने पर बार-बार उल्टी, दौरे पड़ना, बेहोशी, भ्रम, अत्यधिक सुस्ती और शरीर में अकड़न जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
अगर किसी बच्चे को तेज बुखार के साथ दौरे पड़ें, वह बेहोश हो या उसकी मानसिक स्थिति में अचानक बदलाव आए, तो इसे सामान्य बुखार समझकर घर पर इलाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल अस्पताल ले जाना जरूरी है।
संक्रमण की आशंका हो तो क्या करें?
चांदीपुरा जैसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए। इस संक्रमण के लिए फिलहाल कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए इलाज मुख्य रूप से लक्षणों और संभावित जटिलताओं को नियंत्रित करने पर केंद्रित होता है।
गंभीर मरीजों में सांस लेने की क्षमता, ब्लड प्रेशर, शरीर में पानी की मात्रा और मस्तिष्क की स्थिति की लगातार निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।
समय पर अस्पताल पहुंचना गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण है। संक्रमण से बचाव के लिए सैंडफ्लाई और अन्य कीटों से बचाव, घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना तथा कीटों के पनपने वाली परिस्थितियों को कम करना भी जरूरी है।
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