सोनम वांगचुक गिरफ्तार, एनएसए के तहत कार्रवाई; विपक्ष ने जताया विरोध
लेह में तीन दिन पहले भड़की हिंसा के बाद से ही आशंका जताई जा रही थी कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया जा सकता है। शुक्रवार को यह आशंका सच साबित हुई और पुलिस ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया।
विपक्षी दलों और नागरिक समाज ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि इससे हालात और बिगड़ेंगे।
भाषणों की समीक्षा बनी आधार
हिंसा के बाद गृह मंत्रालय के निर्देश पर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां लगातार वांगचुक के भाषणों की समीक्षा कर रही थीं। रिपोर्ट में पाया गया कि उनके कई भाषण युवाओं को उकसाने वाले थे। विशेषकर भूख हड़ताल के दौरान दिए गए बयानों में उन्होंने अरब स्प्रिंग और नेपाल के छात्र आंदोलनों का ज़िक्र किया था। अधिकारियों का मानना है कि इन टिप्पणियों ने 24 सितंबर के प्रदर्शनों को हिंसक रूप दिया।
उसी दिन प्रदर्शनकारियों ने सरकारी दफ्तरों पर हमला किया, वाहनों को जलाया और पुलिस से भिड़ गए। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी।
घर से हिरासत, आरोपों से इनकार
वांगचुक को उनके आवास से हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन ले जाया गया। हालांकि उन्होंने किसी भी तरह की हिंसा या भड़काने के आरोपों से इनकार किया और चेतावनी दी कि उनकी गिरफ्तारी सरकार के लिए “बड़ी चुनौती” साबित होगी।
बाहरी लोगों की जांच
पुलिस अब तक 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें कुछ नेपाली नागरिक और जम्मू-कश्मीर के डोडा ज़िले के लोग भी शामिल हैं। जांचकर्ता अशांति में बाहरी तत्वों की भूमिका तलाश रहे हैं।
एनजीओ पर कार्रवाई
इससे एक दिन पहले ही गृह मंत्रालय ने वांगचुक के सह-स्थापित एनजीओ SECMOL का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया था। मंत्रालय ने इसके पीछे वित्तीय नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया।
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