क्रॉनिक किडनी डिजीज: सिर्फ किडनी नहीं, दिमाग पर भी गहरा असर, पुरुषों में प्रभाव अधिक

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क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) को अक्सर केवल किडनी से जुड़ी समस्या माना जाता है, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि यह रोग हमारी बौद्धिक क्षमता पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अध्ययन में पाया गया है कि CKD से सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता सामान्य से तेज़ी से घट सकती है, जिससे मानसिक कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।

पुरुषों पर ज्यादा असर

रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों में इस रोग का असर महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। पुरुषों में न केवल मानसिक क्षमता में तेज़ गिरावट देखी गई, बल्कि हृदय की कार्यक्षमता में भी अपेक्षाकृत अधिक कमी पाई गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

दिल और दिमाग का संबंध

शोध में यह भी सामने आया कि यह दिमागी गिरावट हृदय और मस्तिष्क के बीच जैविक संबंध के नुकसान के कारण होती है। जब यह संबंध कमजोर होता है, तो दिमाग की कार्यक्षमता पर असर दिखने लगता है। अध्ययन में पुरुषों में यह संबंध अधिक क्षतिग्रस्त पाया गया, जिसके चलते उनमें मानसिक क्षमता का ह्रास तेजी से हुआ।

अध्ययन और निष्कर्ष

यह अध्ययन अमेरिकन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी – हार्ट एंड सर्कुलेटरी फिजियोलॉजी में प्रकाशित हुआ। मार्शल यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता स्नेहा एस. पिल्लई ने बताया कि यह शोध समझने में मदद करता है कि क्रॉनिक किडनी रोग से पीड़ित पुरुषों को अधिक गंभीर मानसिक चुनौतियों का सामना क्यों करना पड़ता है

पिल्लई के अनुसार, किडनी, हृदय और मस्तिष्क को जोड़ने वाले जैविक मार्ग पुरुषों और महिलाओं में अलग तरीके से काम करते हैं, जिससे दोनों में रोग के प्रभाव अलग दिखाई देते हैं।

भविष्य की दिशा

इस नई जानकारी से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसे उपचार या दवाओं पर शोध बढ़ेगा, जो इन जटिल जैविक संबंधों को सुधारकर मानसिक क्षमता के नुकसान को कम कर सकें।

कुल मिलाकर, यह शोध दर्शाता है कि क्रॉनिक किडनी रोग केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है, और यह प्रभाव पुरुषों में विशेष रूप से अधिक तीव्र होता है।

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