यूरोप जाने वालों के लिए बढ़ सकती है परेशानी, बॉर्डर पर अब नहीं मिलेगी जांच में राहत
यूरोप की यात्रा करने वाले गैर-यूरोपीय संघ (EU) के यात्रियों के लिए बॉर्डर चेकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। 6 सितंबर 2026 से यूरोपीय संघ के Entry/Exit System (EES) के तहत दी गई अस्थायी राहत खत्म हो रही है, जिससे व्यस्त बॉर्डर क्रॉसिंग पर बायोमेट्रिक जांच को रोकने की गुंजाइश कम हो जाएगी। इसके चलते यात्रियों को कुछ प्रमुख एयरपोर्ट और बॉर्डर पॉइंट्स पर लंबी कतारों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या है EES सिस्टम?
EES यूरोपीय संघ की नई डिजिटल बॉर्डर व्यवस्था है, जो गैर-EU नागरिकों के शॉर्ट-स्टे यात्रा के दौरान उनकी एंट्री और एग्जिट का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करती है। इसमें यात्री के पासपोर्ट विवरण के साथ फिंगरप्रिंट और चेहरे की तस्वीर जैसे बायोमेट्रिक डेटा दर्ज किए जाते हैं। यह व्यवस्था पुराने मैनुअल पासपोर्ट स्टांपिंग सिस्टम की जगह लाई गई है।
EES शेंगेन क्षेत्र के 29 देशों में लागू है। EU के अलावा आइसलैंड, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन के नागरिकों को इस सिस्टम में पंजीकृत नहीं किया जाता।
क्यों बढ़ सकती हैं बॉर्डर पर कतारें?
गर्मियों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए EU देशों को कुछ विशेष परिस्थितियों में बॉर्डर क्रॉसिंग पर EES की बायोमेट्रिक जांच अस्थायी रूप से रोकने की अनुमति दी गई थी। इसका उद्देश्य अत्यधिक लंबी कतारों और यात्रा में होने वाली देरी को नियंत्रित करना था।
अब यह अस्थायी व्यवस्था खत्म हो रही है। यात्रा उद्योग ने चेतावनी दी है कि यदि बॉर्डर पर तकनीकी या स्टाफिंग संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं, तो व्यस्त एयरपोर्ट पर यात्रियों को दोबारा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
पहली बार यूरोप जाने वालों को क्या करना होगा?
EES के तहत पहली बार संबंधित बाहरी शेंगेन बॉर्डर पार करने वाले पात्र गैर-EU यात्रियों का यात्रा दस्तावेज और बायोमेट्रिक डेटा दर्ज किया जाएगा। बाद की यात्राओं में पहचान का सत्यापन किया जाएगा।
EU के मुताबिक EES का उद्देश्य केवल बॉर्डर प्रक्रिया को डिजिटल बनाना नहीं, बल्कि यात्रियों के अधिक समय तक रुकने यानी overstay की पहचान करना और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोकना भी है।
भारतीय यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
भारतीय नागरिक गैर-EU यात्री होने के कारण शेंगेन क्षेत्र की शॉर्ट-स्टे यात्रा में EES के दायरे में आते हैं। इसलिए भारत से फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, ग्रीस और अन्य EES देशों की यात्रा करने वालों को एयरपोर्ट पर बॉर्डर चेकिंग के लिए अतिरिक्त समय रखना चाहिए।
यात्रियों के लिए सबसे अहम सलाह है कि कनेक्टिंग फ्लाइट या महत्वपूर्ण यात्रा कार्यक्रम के बीच पर्याप्त समय रखें, क्योंकि व्यस्त दिनों में बॉर्डर प्रक्रिया लंबी हो सकती है। हालांकि, हर एयरपोर्ट पर देरी की स्थिति एक जैसी नहीं होगी और कई जगहों पर व्यवस्था सामान्य रूप से चल सकती है।
EES और ETIAS में अंतर
EES को ETIAS से अलग समझना जरूरी है। EES बॉर्डर पर एंट्री-एग्जिट और बायोमेट्रिक रिकॉर्डिंग से जुड़ा सिस्टम है, जबकि ETIAS गैर-EU यात्रियों के लिए भविष्य में लागू होने वाली यात्रा अनुमति व्यवस्था है। यूरोपीय आयोग के अनुसार ETIAS 2026 की आखिरी तिमाही में शुरू होने वाला है, जिसकी सटीक तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
यात्रियों को इसलिए यूरोप रवाना होने से पहले अपने गंतव्य देश और संबंधित एयरलाइन की ताजा यात्रा संबंधी जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
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