अमेरिका की 100% टैरिफ की धमकी से भारत-रूस तेल कारोबार पर दबाव, भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

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अमेरिका की ओर से रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावित कार्रवाई ने भारत-रूस ऊर्जा कारोबार को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को रूस और ईरान पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पारित कर दिया, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं।

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा पर दिया जोर

अमेरिकी कदम के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार घटनाक्रम पर नजर रख रही है। भारत ने दोहराया कि वह अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा और बदलती बाजार परिस्थितियों के आधार पर फैसले करेगा।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस कानून के संभावित द्विपक्षीय और वैश्विक बाजार प्रभावों पर चर्चा भी की है। नई दिल्ली ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।

क्या है 100% टैरिफ का प्रावधान?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को 262-159 के मत से पारित किया। इससे पहले अमेरिकी सीनेट इस विधेयक को 86-11 के अंतर से मंजूरी दे चुकी है। अब विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा।

विधेयक राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का रास्ता खोलता है। हालांकि, कानून पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ तत्काल लागू हो गया है। आगे अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई और कानून के कार्यान्वयन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है रूसी तेल?

रूस पिछले कुछ वर्षों में भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। भारत रूसी तेल को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए उपलब्ध विभिन्न स्रोतों में से एक के रूप में देखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हालिया बैठक में भी ऊर्जा समेत द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की थी।

भारत का तर्क रहा है कि दुनिया के प्रमुख तेल बाजारों में कीमत, उपलब्धता और आपूर्ति की विश्वसनीयता उसके ऊर्जा निर्णयों में महत्वपूर्ण कारक हैं। ऐसे में रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव का असर केवल भारत-रूस व्यापार पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर

अमेरिकी कानून ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर बातचीत जारी है। भारत ने संकेत दिया है कि रूस से ऊर्जा खरीद के मुद्दे पर किसी भी संभावित अमेरिकी कार्रवाई के आर्थिक और व्यापारिक प्रभावों का आकलन किया जाएगा।

भारत और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार के अलावा भुगतान व्यवस्था, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी सहयोग जारी है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल समेत वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों पर काम करने की बात कही है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस कानून के तहत भारत जैसे देशों के खिलाफ टैरिफ लगाने के अधिकार का इस्तेमाल करते हैं या नहीं। इसके अलावा, भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद, अन्य देशों से ऊर्जा आयात और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस बीच, भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि ऊर्जा सुरक्षा और 1.4 अरब लोगों के हित उसकी प्राथमिकता हैं, जबकि अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए ऊर्जा खरीदने वाले देशों को भी निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है।

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