देवशयनी एकादशी और चातुर्मास: जानिए क्या करें और क्या नहीं इन चार पवित्र महीनों में
आषाढ़ शुक्ल एकादशी को हर वर्ष देवशयनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि 6 जुलाई, रविवार को पड़ रही है। इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है।
यह अवधि चार महीने चलती है और इसे मांगलिक कार्यों के लिए निषेध काल माना जाता है। हालांकि, तप, यज्ञ और भक्ति जैसे कार्यों के लिए यह अत्यंत शुभ माना गया है।
गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी ने News18 से बातचीत में बताया कि चातुर्मास में किन कार्यों को करने की सलाह दी जाती है और किनसे बचना चाहिए:
✅ चातुर्मास में क्या करें:
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प्रातःकाल जागरण: सुबह जल्दी उठें, स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें और प्रणाम करें।
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ध्यान और जप: आध्यात्मिक उन्नति के लिए भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, भक्ति में मन लगाएं।
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सात्विक जीवनशैली: तामसिक और मांसाहारी भोजन से परहेज कर केवल सात्विक भोजन करें।
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दान और सेवा: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
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वर्णों का चयन: लाल, हरा, पीला और नारंगी जैसे शुभ रंगों के वस्त्र पहनें।
❌ चातुर्मास में क्या न करें:
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सोना-चांदी की खरीदारी: इन धातुओं को सूर्य का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान इन्हें खरीदने से कुंडली में सूर्य की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
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काले रंग की वस्तुएं: काले रंग से शनि का संबंध होता है। चातुर्मास में इनकी खरीदारी करने से शनि की दृष्टि प्रतिकूल हो सकती है।
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वाहन खरीदना: मान्यता है कि इस अवधि में खरीदे गए वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना अधिक रहती है।
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इलेक्ट्रॉनिक सामान: मोबाइल, लैपटॉप, टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की खरीदारी भी वर्जित मानी जाती है, क्योंकि यह ग्रहों की स्थिति को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष:
चातुर्मास का समय आत्मचिंतन, संयम, और भक्ति के लिए उत्तम है। यदि इन नियमों और परंपराओं का पालन श्रद्धा से किया जाए, तो यह काल व्यक्ति के जीवन में शुभता और स्थिरता ला सकता है।
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