टीईटी अनिवार्यता पर देशभर में विरोध, शिक्षकों ने नियमों में संशोधन की मांग उठाई

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शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को नौकरी और प्रोन्नति के लिए अनिवार्य बनाए जाने पर देशभर के शिक्षकों में नाराज़गी है। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने सरकार पर नियमों में संशोधन का दबाव बनाने और कानूनी विकल्प तलाशने की तैयारी शुरू कर दी है।

संघ का तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी अनिवार्यता से पहले हुई थी, उनकी सेवा उन्हीं शर्तों पर जारी रहनी चाहिए और प्रोन्नति भी उन्हीं नियमों से मिलनी चाहिए। संघ के अध्यक्ष सुशील पांडेय ने कहा कि कोर्ट के फैसले से राहत दिलाने के लिए सरकार से बातचीत होगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को दो साल के भीतर टीईटी पास करना होगा, अन्यथा उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। प्रोन्नति के लिए भी टीईटी पास करना जरूरी है। केवल वे शिक्षक जिनकी सेवा अवधि पांच वर्ष से कम बची है, परीक्षा से छूट पाएंगे।

शिक्षकों की दिक्कतें

  • मृतक आश्रित शिक्षक जिन्हें प्रशिक्षण से छूट मिली थी, अब टीईटी आवेदन नहीं कर सकते।

  • राज्यों और सीटीईटी में आयु सीमा पार कर चुके शिक्षक पात्र नहीं हैं।

  • इंटर के बाद नौकरी पाने वाले बीएड/बीपीएड उत्तीर्ण शिक्षक भी आवेदन नहीं कर सकते, क्योंकि टीईटी के लिए स्नातक के साथ बीटीसी या डीएलएड अनिवार्य है।

आगे की राह

संघ का कहना है कि सरकार और अदालत को इन जटिलताओं पर ध्यान देना होगा। कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की जाएंगी। उधर, कई राज्य सरकारों ने टीईटी पास और नॉन-टीईटी शिक्षकों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकारें इस पर सक्रिय हैं और शिक्षकों को आश्वासन दिया गया है कि मामले पर गंभीरता से विचार होगा।

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