भारत ने NAG MK-2 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल परीक्षण किया, रक्षा क्षमताओं में वृद्धि

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देश और दुनिया में बदलते सामरिक हालात के बीच आधुनिक हथियार प्रणालियों की मांग बढ़ रही है। घातक मिसाइलों से लेकर मॉडर्न फाइटर जेट्स तक की जरूरत को देखते हुए भारत भी प्रोडक्शन और इंपोर्ट दोनों स्तरों पर अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने NAG MK-2 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो भारतीय सेना की ताकत में महत्वपूर्ण वृद्धि करेगा।

NAG MK-2 मिसाइल की खासियत

  • तीसरी पीढ़ी की मिसाइल, सभी मौसमों में काम करने योग्य, प्रक्षेपण के बाद लॉक होने की क्षमता के साथ।

  • हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक (HEAT) वारहेड, मॉडर्न टैंकों को नष्ट करने के लिए एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) का इस्तेमाल।

  • NAG MK-1 का रेंज 1.4 किलोमीटर था, जबकि NAG MK-2 का रेंज 7 से 10 किलोमीटर तक होगा।

स्वदेशी हल्के टैंक ‘ज़ोरावर’ पर परीक्षण

परीक्षण ज़ोरावर लाइट टैंक पर किया गया, जिसे DRDO के कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (CVRDE), चेन्नई ने डिजाइन किया और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने इसका निर्माण किया। यह परियोजना सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के मजबूत समन्वय का उदाहरण है।
ज़ोरावर लाइट टैंक को ऊंचाई वाले इलाकों से लेकर रेगिस्तानी क्षेत्रों तक तैनाती के लिए डिजाइन किया गया है। इसका वजन भारी टैंकों की तुलना में कम है, जिससे यह कठिन और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में भी तेजी से काम कर सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता में योगदान

इस सफलता ने न केवल भारत की उन्नत युद्धक क्षमता को दर्शाया है, बल्कि स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और सहयोगी संगठनों को बधाई देते हुए कहा कि यह परीक्षण देश की तकनीकी क्षमता और जटिल हथियार प्रणालियों के स्वदेशी एकीकरण की दक्षता को प्रमाणित करता है।

NAG MK-2 मिसाइल अब भारतीय सेना के बॉर्डर इलाकों में दुश्मन की मूवमेंट को प्रभावी तरीके से नियंत्रित करने में मदद करेगी और आधुनिक युद्ध क्षमताओं में नया आयाम जोड़ेगी।

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