भारत के लिए बढ़ा खतरा: बांग्लादेश से आतंक की नई हलचल, पाकिस्तान की साजिश का पर्दाफाश
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौर में हरकत-उल-जिहादी-इस्लामी (हूजी) समूह फिर सक्रिय हो गया है।
खुफिया इनपुट के अनुसार ‘मित्रवत शासन’ की नीति को देखते हुए हूजी ने पुनर्गठन और सीमावर्ती क्षेत्रों में माड्यूल स्थापित करने की कार्रवाई तेज कर दी है।
मुख्य बिंदु
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भारतीय खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जमात-ए-इस्लामी और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआइ की मदद से हूजी जैसी कट्टरवादी धाराएँ बांग्लादेश से भारतीय सीमाओं के नजदीक सक्रिय हो रही हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन महीनों में आईएसआइ और हूजी नेताओं के बीच कम-से-कम छह बैठकों की जानकारी मिली, जिनमें सीमापार माड्यूल और हतियार एवं धन के प्रवाह से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा हुई।
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पश्चिम बंगाल और भारत के पूर्वोत्तर राज्य लक्ष्य बने हुए हैं; इन क्षेत्रों में पहले भी हूजी के कुछ माड्यूल सक्रिय रहे हैं, लेकिन शेख हसीना के शासनकाल में उनकी क्रियाशीलता नियंत्रित थी।
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बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक बदलावों और मुहम्मद यूनुस के पाकिस्तान के साथ संभावित समझौते के बाद आईएसआइ के लिए वहां पहुंच सहज होने की आशंका जताई जा रही है।
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रिहा किए गए बीएनपी नेता अब्दुस सलाम ‘पिंटू’ का नाम भी लिया जा रहा है — उन पर पहले आतंकवादियों को धन मुहैया कराने और हथियार की आपूर्ति में भूमिका का आरोप था; उनके बाग़ी नेताओं के साथ संबंधों से हूजी को समर्थन मिलने की आशंका है।
विस्तार
हूजी का उदय मूलतः पाकिस्तान के कुछ कट्टरवादी व धार्मिक संगठनों से जुड़ा माना जाता है और उसका शुरुआती फोकस जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों पर रहा। वर्षों पहले भारतीय एजेंसियों की कड़ी निगरानी और बांग्लादेश में शेख हसीना के प्रभाव के कारण इन गतिविधियों में कमी आई थी। अब, राजनीतिक हालात में बदलाव से यह नेटवर्क फिर सक्रिय दिखाई दे रहा है — सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि हथियार, गोला-बारूद और वित्तीय साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था हो रही है और सीमापार प्रशिक्षण व भर्ती गतिविधियाँ फिर शुरू होने की आशंका है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि आईएसआइ और स्थानीय चरमपंथी समूहों के बीच तालमेल बना तो यह सीधे तौर पर भारत के पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर पर असर डाल सकता है। भारतीय एजेंसियाँ इस खतरे को देखते हुए सीमा सुरक्षा, गुप्तचर जानकारी साझा करने और स्थानीय सतर्कता बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
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