आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025: कब से शुरू, क्या करें और किन गलतियों से बचें?

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हर वर्ष चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इनमें दो को प्रकट नवरात्रि कहा जाता है—चैत्र और शारदीय नवरात्रि, जो व्यापक रूप से मनाई जाती हैं। वहीं दो नवरात्रियाँ गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं—माघ और आषाढ़ महीने में, जिनमें विशेष रूप से तांत्रिक साधनाओं और मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की उपासना की जाती है।

गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना, आत्मिक शक्ति और विशेष मनोकामना पूर्ति का काल मानी जाती है। इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 26 जून से 04 जुलाई 2025 तक मनाई जाएगी।


गुप्त नवरात्रि में किन गलतियों से बचें?

देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 26 जून को सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी, जो इसे अत्यंत शुभ बनाता है। लेकिन कुछ विशेष नियमों का पालन न करने पर साधना निष्फल हो सकती है और मां दुर्गा की कृपा नहीं मिलती।

1. तामसिक भोजन और नशा न करें

गुप्त नवरात्रि में मांस, मदिरा और अन्य तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है। यह साधना की शुद्धता को नष्ट कर सकता है और नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है।

2. ज्वार न बोएं

प्रकट नवरात्रि में घटस्थापना के समय ज्वार बोने की परंपरा होती है, लेकिन गुप्त नवरात्रि में यह वर्जित है। ऐसा करना शुभता को पाप में बदल सकता है।

3. रौद्र रूप की तस्वीर न लगाएं

पूजा स्थल पर मां दुर्गा के रौद्र रूप—जैसे काली या चामुंडा की अत्यधिक उग्र छवियाँ—स्थापित न करें। इससे मानसिक तनाव और जीवन में नकारात्मकता बढ़ सकती है।

4. दक्षिण दिशा की यात्रा से बचें

गुप्त नवरात्रि के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को अशुभ माना गया है। यह दिशा यम की मानी जाती है और इस दौरान वहां की यात्रा साधना के प्रतिकूल हो सकती है।


गुप्त नवरात्रि: साधना का विशेष समय

गुप्त नवरात्रि तंत्र विद्या, आध्यात्मिक उन्नति और गुप्त शक्तियों के जागरण के लिए श्रेष्ठ समय है। यदि विधि-विधान और संयम के साथ पूजा की जाए, तो मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं और साधक की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

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