दिल्ली में गरीबों को मिलेगा अपना घर: 10 लाख मकानों की जरूरत, पहले चरण में बनेंगे 50 हजार फ्लैट — CM रेखा गुप्ता

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार सुबह सुल्तानपुरी के सी-ब्लॉक स्थित डीडीए (ड्यूसिब) द्वारा निर्मित फ्लैट्स का निरीक्षण किया और वहां की मौजूदा स्थिति का जायज़ा लिया। उन्होंने फ्लैट्स की जर्जर हालत पर गहरी चिंता जताई और कहा कि यह स्थिति पूर्ववर्ती सरकारों की उदासीनता और नीयत की कमी का नतीजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार झुग्गीवासियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री के साथ सांसद योगेंद्र चांदोलिया और कैबिनेट मंत्री आशीष सूद भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि इन फ्लैट्स का निर्माण वर्ष 2016 में पूरा हो गया था, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ये मकान अभी तक उनके वास्तविक हकदारों को नहीं मिल पाए।

पुनर्वास योजना और 10 लाख मकानों का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि दिल्ली को करीब 10 लाख मकानों की आवश्यकता है। सरकार पहले चरण में 50,000 फ्लैट्स के जरिए गरीबों के पुनर्वास की शुरुआत करेगी। इस दिशा में काम शुरू हो चुका है और केंद्र सरकार से 732 करोड़ रुपये की धनराशि भी प्राप्त हो चुकी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन फ्लैट्स की मरम्मत संभव है, उन्हें शीघ्र दुरुस्त किया जाए और जो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, उन्हें नए सिरे से बनाया जाए।

परियोजना का संक्षिप्त विवरण

  • परियोजना का नाम: ईडब्ल्यूएस लो-कॉस्ट हाउसिंग, सुल्तानपुरी

  • निर्माण वर्ष: लगभग 9 वर्ष पूर्व

  • कुल फ्लैट्स: 1060

  • कुल क्षेत्रफल: 27,720 वर्गमीटर

  • प्रत्येक आवास का कार्पेट एरिया: 25 वर्गमीटर

  • फ्लैट की संरचना: 1 लिविंग रूम, 1 बेडरूम, किचन, बाथरूम, शौचालय, बालकनी

  • परियोजना लागत: प्रारंभिक स्वीकृति – ₹52.81 करोड़, संशोधित लागत – ₹67.84 करोड़

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार की यह प्राथमिकता है कि वर्षों से उपेक्षित इन फ्लैट्स को पुनः उपयोग योग्य बनाया जाए और असली ज़रूरतमंदों को शीघ्र आवंटित किया जाए। यह कदम न केवल आवास संकट को दूर करेगा, बल्कि हजारों गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन भी प्रदान करेगा।

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